कक्षा 10 लेखकों का जीवन परिचय

कक्षा 10 में गद्य तथा पद्य में कुल 20 लेखको की जीवनी दी गयी है। जिनमे से गद्य से तथा पद्य से अलग अलग 1-1 जीवनी परीक्षा में पूछी जाती है। कक्षा 9 लेखकों का जीवन परिचय कुल 6 अंक का पूछा जाता है। 3 अंक का गद्य से तथा 3 अंक का ही पद्य से जीवन परिचय पूछा जाता है।

पद्य के लेखक

  1. सूरदास
  2. गोस्वामी तुलसीदास
  3. रसखान
  4. बिहारीलाल
  5. सुमित्रानंदन पंत
  6. महादेवी वर्मा
  7. पंडित राम नरेश त्रिपाठी
  8. माखनलाल चतुर्वेदी
  9. सुभद्रा कुमारी चौहान
  10. मैथिलीशरण गुप्त
  11. केदारनाथ सिंह
  12. अशोक बाजपेई
  13. श्याम नारायण पांडे
गद्य के लेखक
आचार्य रामचंद्र शुक्ल

जन्म
जन्म स्थान
पिता
माता
सम्मान

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

जयशंकर प्रसाद

जन्म
30 जनवरी 1889
जन्म स्थान
वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत
मृत्यू
15 नवंबर 1937
पिता
बाबू देवीप्रसाद
सम्मान
जयशंकर प्रसाद को 'कामायनी' पर मंगलाप्रसाद पारितोषिक प्राप्त हुआ था।

कक्षा 10 लेखकों का जीवन परिचय 1
जयशंकर प्रसाद
कवि, नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार

आधुनिक हिन्दी साहित्य के इतिहास में इनके कृतित्व का गौरव अक्षुण्ण है। वे एक युगप्रवर्तक लेखक थे जिन्होंने एक ही साथ कविता, नाटक, कहानी और उपन्यास के क्षेत्र में हिंदी को गौरवान्वित होने योग्य कृतियाँ दीं। कवि के रूप में वे निराला, पन्त, महादेवी के साथ छायावाद के प्रमुख स्तम्भ के रूप में प्रतिष्ठित हुए हैं; नाटक लेखन में भारतेन्दु के बाद वे एक अलग धारा बहाने वाले युगप्रवर्तक नाटककार रहे जिनके नाटक आज भी पाठक न केवल चाव से पढ़ते हैं, बल्कि उनकी अर्थगर्भिता तथा रंगमंचीय प्रासंगिकता भी दिनानुदिन बढ़ती ही गयी है। इस दृष्टि से उनकी महत्ता पहचानने एवं स्थापित करने में वीरेन्द्र नारायण, शांता गाँधी, सत्येन्द्र तनेजा एवं अब कई दृष्टियों से सबसे बढ़कर महेश आनन्द का प्रशंसनीय ऐतिहासिक योगदान रहा है। इसके अलावा कहानी और उपन्यास के क्षेत्र में भी उन्होंने कई यादगार कृतियाँ दीं। विविध रचनाओं के माध्यम से मानवीय करुणा और भारतीय मनीषा के अनेकानेक गौरवपूर्ण पक्षों का उद्घाटन। 48 वर्षो के छोटे से जीवन में कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास और आलोचनात्मक निबंध आदि विभिन्न विधाओं में रचनाएँ की।


शिक्षा - दीक्षा

प्रसाद जी की प्रारंभिक शिक्षा काशी में क्वींस कालेज में हुई, किंतु बाद में घर पर इनकी शिक्षा का व्यापक प्रबंध किया गया, जहाँ संस्कृत, हिंदी, उर्दू, तथा फारसी का अध्ययन इन्होंने किया। दीनबंधु ब्रह्मचारी जैसे विद्वान्‌ इनके संस्कृत के अध्यापक थे। इनके गुरुओं में 'रसमय सिद्ध' की भी चर्चा की जाती है।

घर के वातावरण के कारण साहित्य और कला के प्रति उनमें प्रारंभ से ही रुचि थी और कहा जाता है कि नौ वर्ष की उम्र में ही उन्होंने 'कलाधर' के नाम से व्रजभाषा में एक सवैया लिखकर 'रसमय सिद्ध' को दिखाया था। उन्होंने वेद, इतिहास, पुराण तथा साहित्य शास्त्र का अत्यंत गंभीर अध्ययन किया था। वे बाग-बगीचे तथा भोजन बनाने के शौकीन थे और शतरंज के खिलाड़ी भी थे। वे नियमित व्यायाम करनेवाले, सात्विक खान पान एवं गंभीर प्रकृति के व्यक्ति थे। वे नागरीप्रचारिणी सभा के उपाध्यक्ष भी थे। क्षय रोग से नवम्बर 14, 1937 (दिन-सोमवार) को प्रातःकाल (उम्र 47) उनका देहान्त काशी में हुआ।

रचनाएँ
काव्य
  1. कानन कुसुम
  2. झरना
  3. आंसू
  4. लहर
  5. कामायनी
  6. प्रेम पथिक
कहानी

कथा के क्षेत्र में प्रसाद जी आधुनिक ढंग की कहानियों के आरंभयिता माने जाते हैं। सन्‌ 1912 ई. में 'इंदु' में उनकी पहली कहानी 'ग्राम' प्रकाशित हुई। उन्होंने कुल 72 कहानियाँ लिखी हैं।

  1. छाया
  2. प्रतिध्वनि
  3. आकाशदीप
  4. आंधी
  5. इन्द्रजाल
उपन्यास

प्रसाद ने तीन उपन्यास लिखे हैं।

  1. 'कंकाल', में नागरिक सभ्यता का अंतर यथार्थ उद्घाटित किया गया है।
  2. 'तितली' में ग्रामीण जीवन के सुधार के संकेत हैं।
  3. 'इरावती' ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर लिखा गया इनका अधूरा उपन्यास है जो रोमांस के कारण ऐतिहासिक रोमांस के उपन्यासों में विशेष आदर का पात्र है।

इन्होंने अपने उपन्यासों में ग्राम, नगर, प्रकृति और जीवन का मार्मिक चित्रण किया है जो भावुकता और कवित्व से पूर्ण होते हुए भी प्रौढ़ लोगों की शैल्पिक जिज्ञासा का समाधान करता है।

नाटक
  1. स्कंदगुप्त
  2. चंद्रगुप्त
  3. ध्रुवस्वामिनी
  4. जन्मेजय का नाग यज्ञ
  5. राज्यश्री
  6. कामना
  7. एक घूंट

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी

जन्म
जन्म स्थान
मृत्यू
पिता
माता
सम्मान

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी

डॉ राजेंद्र प्रसाद

जन्म
जन्म स्थान
मृत्यू
पिता
माता
सम्मान

डॉ राजेंद्र प्रसाद

रामधारी सिंह दिनकर

जन्म
23 सितम्बर 1908
जन्म स्थान
मद्रास, तमिलनाडु, भारत
मृत्यू
24 अप्रैल 1974

कक्षा 10 लेखकों का जीवन परिचय 2
रामधारी सिंह दिनकर
कवि, लेखक

रामधारी सिंह दिनकर हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे। वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं।

'दिनकर' स्वतन्त्रता पूर्व एक विद्रोही कवि के रूप में स्थापित हुए और स्वतन्त्रता के बाद 'राष्ट्रकवि' के नाम से जाने गये। वे छायावादोत्तर कवियों की पहली पीढ़ी के कवि थे। एक ओर उनकी कविताओ में ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति की पुकार है तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति है। इन्हीं दो प्रवृत्तियों का चरम उत्कर्ष हमें उनकी कुरुक्षेत्र और उर्वशी नामक कृतियों में मिलता है।


शिक्षा - दीक्षा

उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से इतिहास राजनीति विज्ञान में बीए किया। उन्होंने संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेजी और उर्दू का गहन अध्ययन किया था। बी. ए. की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे एक विद्यालय में अध्यापक हो गये। 1934 से 1947 तक बिहार सरकार की सेवा में सब-रजिस्टार और प्रचार विभाग के उपनिदेशक पदों पर कार्य किया। 1950 से 1952 तक मुजफ्फरपुर कालेज में हिन्दी के विभागाध्यक्ष रहे, भागलपुर विश्वविद्यालय के उपकुलपति के पद पर कार्य किया और उसके बाद भारत सरकार के हिन्दी सलाहकार बने।

प्रमुख रचनाएँ
काव्य
  1. बारदोली-विजय संदेश

  2. प्रणभंग

  3. रेणुका

  4. हुंकार

  5. रसवन्ती

  6. द्वंद्वगीत

  7. कुरूक्षेत्र

  8. धूप-छाँह

  9. सामधेनी

  10. बापू

  11. इतिहास के आँसू

  12. धूप और धुआँ

  13. मिर्च का मज़ा

  14. रश्मिरथी

  15. दिल्ली

  16. नीम के पत्ते

  17. नील कुसुम

  18. सूरज का ब्याह

  19. चक्रवाल

  20. कवि-श्री

भगवतशरण उपाध्याय

जन्म
जन्म स्थान
मृत्यू
पिता
माता
सम्मान

भगवतशरण उपाध्याय

जयप्रकाश भारती

जन्म
जन्म स्थान
मृत्यू
पिता
माता
सम्मान

जयप्रकाश भारती

पद्य के लेखक
सूरदास

गोस्वामी तुलसीदास

रसखान

बिहारीलाल

सुमित्रानंदन पंत

महादेवी वर्मा

पंडित राम नरेश त्रिपाठी

माखनलाल चतुर्वेदी

सुभद्रा कुमारी चौहान

मैथिलीशरण गुप्त

केदारनाथ सिंह

अशोक बाजपेई

श्याम नारायण पांडे

कक्षा 9 लेखकों का जीवन परिचय

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