हजारी प्रसाद द्विवेदी

हजारी प्रसाद द्विवेदी
साहित्यकार

द्विवेदी जी का व्यक्तित्व बड़ा प्रभावशाली और उनका स्वभाव बड़ा सरल और उदार था। वे हिंदी, अंग्रेज़ी, संस्कृत और बाङ्ला भाषाओं के विद्वान थे। भक्तिकालीन साहित्य का उन्हें अच्छा ज्ञान था।

शिक्षा

द्विवेदी जी ने इंटर तक की शिक्षा प्राप्त करके ज्योतिष शास्त्र में आचार्य की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। सन 1940 से 1950 ईस्वी तक वे शांतिनिकेतन में हिंदी विभाग के निदेशक के रूप में रहे। यही इनकी साहित्य प्रतिभा का विकास हुआ। उसके बाद द्विवेदी जी को सन 1949 ईस्वी में लखनऊ विश्वविद्यालय ने डी लिट की उपाधि से विभूषित किया। इन्होंने काशी विश्वविद्यालय कथा चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में हिंदी के अध्यक्ष पद पर कार्य किया।

रचनाएँ
निबंध संग्रह
  • अशोक के फूल
  • कल्‍पलता
  • विचार और वितर्क
  • विचार-प्रवाह
  • कुटज
  • विश के दन्त
  • कल्पतरु
  • गतिशील चिंतन
  • साहित्य सहचर
उपन्‍यास
  • बाणभट्ट की आत्‍मकथा
  • चारु चंद्रलेख
  • पुनर्नवा
  • अनामदास का पोथा
ग्रंथ
  • हजारीप्रसाद द्विवेदी ग्रन्थावली
जन्म
सन 1907 ई॰
जन्म स्थान
दुबे का छपरा बलिया उत्तर प्रदेश
मृत्यू
19 मई 1979
पिता
अनमोल द्विवेदी
सम्मान
हजारी प्रसाद द्विवेदी को साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में सन 1957 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।