मुंशी प्रेमचंद

मुंशी प्रेमचंद
अध्यापक, लेखक (कहानी और उपन्यासकार), पत्रकार

प्रेमचंद हिन्दी और उर्दू के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार, कहानीकार एवं विचारक थे। उनमें से अधिकांश हिंदी तथा उर्दू दोनों भाषाओं में प्रकाशित हुईं। उन्होंने अपने दौर की सभी प्रमुख उर्दू और हिंदी पत्रिकाओं जमाना, सरस्वती, माधुरी, मर्यादा, चाँद, सुधा आदि में लिखा। उन्होंने हिंदी समाचार पत्र जागरण तथा साहित्यिक पत्रिका हंस का संपादन और प्रकाशन भी किया। इसके लिए उन्होंने सरस्वती प्रेस खरीदा जो बाद में घाटे में रहा और बंद करना पड़ा। प्रेमचंद फिल्मों की पटकथा लिखने मुंबई आए और लगभग तीन वर्ष तक रहे। जीवन के अंतिम दिनों तक वे साहित्य सृजन में लगे रहे। महाजनी सभ्यता उनका अंतिम निबंध, साहित्य का उद्देश्य अंतिम व्याख्यान, कफन अंतिम कहानी, गोदान अंतिम पूर्ण उपन्यास तथा मंगलसूत्र अंतिम अपूर्ण उपन्यास माना जाता है।

1906 से 1936 के बीच लिखा गया प्रेमचंद का साहित्य इन तीस वर्षों का सामाजिक सांस्कृतिक दस्तावेज है। इसमें उस दौर के समाजसुधार आंदोलनों, स्वाधीनता संग्राम तथा प्रगतिवादी आंदोलनों के सामाजिक प्रभावों का स्पष्ट चित्रण है। उनमें दहेज, अनमेल विवाह, पराधीनता, लगान, छूआछूत, जाति भेद, विधवा विवाह, आधुनिकता, स्त्री-पुरुष समानता, आदि उस दौर की सभी प्रमुख समस्याओं का चित्रण मिलता है। आदर्शोन्मुख यथार्थवाद उनके साहित्य की मुख्य विशेषता है। हिंदी कहानी तथा उपन्यास के क्षेत्र में 1918 से 1936 तक के कालखंड को ‘प्रेमचंद युग’ कहा जाता है।

शिक्षा

प्रेमचंद के जीवन का साहित्य से क्या संबंध है इस बात की पुष्टि रामविलास शर्मा के इस कथन से होती है कि-

सौतेली माँ का व्यवहार, बचपन में शादी, पंडे-पुरोहित का कर्मकांड, किसानों और क्लर्कों का दुखी जीवन

  • यह सब प्रेमचंद ने सोलह साल की उम्र में ही देख लिया था। इसीलिए उनके ये अनुभव एक जबर्दस्त सचाई लिए हुए उनके कथा-साहित्य में झलक उठे थे।
  • उनकी बचपन से ही पढ़ने में बहुत रुचि थी।
  • 13 साल की उम्र में ही उन्‍होंने तिलिस्म-ए-होशरुबा पढ़ लिया और उन्होंने उर्दू के मशहूर रचनाकार रतननाथ ‘शरसार’, मिर्ज़ा हादी रुस्वा और मौलाना शरर के उपन्‍यासों से परिचय प्राप्‍त कर लिया।
  • उनका पहला विवाह पंद्रह साल की उम्र में हुआ।
  • 1906 में उनका दूसरा विवाह शिवरानी देवी से हुआ जो बाल-विधवा थीं।
  • वे सुशिक्षित महिला थीं जिन्होंने कुछ कहानियाँ और प्रेमचंद घर में शीर्षक पुस्तक भी लिखी।
  • 1898 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे एक स्थानीय विद्यालय में शिक्षक नियुक्त हो गए।
  • नौकरी के साथ ही उन्होंने पढ़ाई जारी रखी।
  • उनकी शिक्षा के संदर्भ में रामविलास शर्मा लिखते हैं कि- “1910 में अंग्रेज़ी, दर्शन, फ़ारसी और इतिहास लेकर इंटर किया और 1919 में अंग्रेज़ी, फ़ारसी और इतिहास लेकर बी. ए. किया।”
  • 1919 में बी.ए. पास करने के बाद वे शिक्षा विभाग के इंस्पेक्टर पद पर नियुक्त हुए।
रचनाएँ
उपन्यास

मुंशी जी ने डेढ़ दर्जन से ज़्यादा तक उपन्यास लिखे।

  1. सेवासदन
  2. प्रेमाश्रम
  3. रंगभूमि
  4. निर्मला
  5. गबन
  6. कर्मभूमि
  7. गोदान
  8. कायाकल्प
  9. प्रतिज्ञा
  10. निर्मला
  11. रूठी रानी
  12. मंगलसूत्र (अपूर्ण) जिसे उनके पुत्र अमृतराय ने पूरा किया।
कहानी

प्रेमचंद ने तीन सौ से अधिक कहानियाँ लिखीं जिनमे मुख्य रूप से निम्न कहानियो की रचना की-

  1. कफन
  2. पूस की रात
  3. पंच परमेश्वर
  4. बड़े घर की बेटी
  5. बूढ़ी काकी
  6. दो बैलों की कथा

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    नाटक
    • संग्राम
    • कर्बला
    • प्रेम की वेदी
    जन्म
    1880
    जन्म स्थान
    लमही वाराणसी उत्तर प्रदेश
    मृत्यू
    08 अक्टूबर 1930
    पिता
    मुंशी अजायबराय
    माता
    आनन्दी देवी
    सम्मान
    1918 से 1936 तक के कालखंड को ‘प्रेमचंद युग’ कहा जाता है।