पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
मास्टरजी, निबंधकार

पदुमलाल पन्नालाल बख्शी ने अध्यापन, संपादन लेखन के क्षेत्र में कार्य किए। उन्होंने कविताएँ, कहानियाँ और निबंध सभी कुछ लिखा हैं पर उनकी ख्याति विशेष रूप से निबंधों के लिए ही है। उन्होंने 1929 से 1934 तक अनेक पाठ्यपुस्तकों यथा- पंचपात्र, विश्वसाहित्य, प्रदीप की रचना की और वे प्रकाशित हुईं।

शिक्षा

उनकी प्राथमिक शिक्षा म.प्र. के प्रथम मुख्‍यमंत्री पं॰ रविशंकर शुक्‍ल जैसे मनीषी गुरूओं के सानिध्‍य में विक्‍टोरिया हाई स्‍कूल, खैरागढ में हुई थी। प्रारंभ से ही इनकी प्रतिभा को खैरागढ के ही इतिहासकार लाल प्रद्युम्‍न सिंह जी ने समझा एवं बख्‍शी जी को साहित्‍य सृजन के लिए प्रोत्‍साहित किया और यहीं से साहित्‍य की अविरल धारा बह निकली। बख्‍शी जी ने बनारस हिन्‍दू कॉलेज से बी.ए. किया और एल.एल.बी. करने लगे, किन्‍तु वे साहित्‍य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता एवं समयाभाव के कारण एल.एल.बी. पूरा नहीं कर पाए।

रचनाएँ
कविताएँ
  1. अश्रुदल
  2. शतदल
  3. पंच-पात्र
नाटक
  1. अन्नपूर्णा का मंदिर
  2. उन्मुक्ति का बंधन
उपन्यास
  1. कथा-चक्र
  2. भोला (बाल उपन्यास)
  3. वे दिन (बाल उपन्यास)
समालोचना-निबन्ध
  1. हिन्दी साहित्य विमर्श
  2. विश्व-साहित्य
  3. हिन्दी कहानी साहित्य
  4. हिन्दी उपन्यास साहित्य
  5. प्रदीप
  6.  
  7.  
  8.  
आत्मकथा-संस्मरण
  1. मेरी अपनी कथा
  2. जिन्हें नहीं भूलूंगा
साहित्य-समग्र

बख्शी ग्रन्थावली

जन्म
27 May 1894
जन्म स्थान
राजनांदगांव, छत्तीसगढ़, भारत
मृत्यू
28 दिसंबर, 1971
पिता
पुन्नालाल बख्शी
सम्मान
हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा सन् 1949 में साहित्य वाचस्पति की उपाधि से अलंकृत किया गया। इसके ठीक एक साल बाद वे मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभापति निर्वाचित हुए।