पंडित प्रताप नारायण मिश्र

पंडित प्रताप नारायण मिश्र
लेखक, कवि और पत्रकार

वह भारतेंदु निर्मित एवं प्रेरित हिंदी लेखकों की सेना के महारथी, उनके आदर्शो के अनुगामी और आधुनिक हिंदी भाषा तथा साहित्य के निर्माणक्रम में उनके सहयोगी थे। भारतेंदु पर उनकी अनन्य श्रद्धा थी, वह अपने आप को उनका शिष्य कहते तथा देवता की भाँति उनका स्मरण करते थे। भारतेंदु जैसी रचनाशैली, विषयवस्तु और भाषागत विशेषताओं के कारण मिश्र जी “प्रति-भारतेंदु” और “द्वितीय हरिश्चंद्र” कहे जाने लगे थे।

शिक्षा

मिश्रा जी की प्रारंभिक शिक्षा कानपुर में हुई। इनके पिता इन्हें ज्योतिष ज्ञान कराकर पैतृक व्यवसाय में लगाना चाहते थे। परंतु मनमौजी स्वभाव होने के कारण मिश्र जी ने स्वाध्याय से ही संस्कृत उर्दू फारसी अंग्रेजी और बांग्ला भाषा का ज्ञान प्राप्त किया।

रचनाएँ
नाटक
  • गो संकट,
  • भारत दुर्दशा,
  • कलिकौतुक,
  • कलिप्रभाव,
  • हठी हम्मीर
  • जुआरी-खुआरी (प्रहसन)
  • संगीत शाकुंतल (कालिदास के ‘अभिज्ञानशाकुंतम्’ का अनुवाद)
निबंध संग्रह
  • निबंध नवनीत,
  • प्रताप पीयूष,
  • प्रताप समीक्षा
अनूदित गद्य कृतियाँ
  • राजसिंह,
  • अमरसिंह,
  • इन्दिरा,
  • राधारानी,
  • युगलांगुरीय,
  • चरिताष्टक,
  • पंचामृत,
  • नीतिरत्नमाला,
  • बात
कविता
  • प्रेम पुष्पावली,
  • मन की लहर,
  • ब्रैडला स्वागत,
  • दंगल खंड,
  • तृप्यन्ताम्,
  • लोकोक्तिशतक,
  • दीवो बरहमन (उर्दू)
जन्म
24 सितम्बर 1856
जन्म स्थान
ग्राम बैजे उन्नाव उत्तर प्रदेश
मृत्यू
6 जुलाई, 1894
पिता
संकटा प्रसाद मिश्र