सुभद्रा कुमारी चौहान

राष्ट्रीय चेतना की प्रथम कवित्री, स्वतंत्रता संग्राम की सक्रिय सेनानी, राष्ट्रीय चेतना की अमर गायिका तथा वीर रस की एकमात्र हिंदी कवित्री श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म सन 1908 में इलाहाबाद के एक संपन्न परिवार में हुआ था।इनके पिता का नाम रामनाथ सिंह था। यह प्रयाग के क्रोस्थवेटगर्ल्स कॉलेज की छात्रा रही। 15 वर्ष की अवस्था में इनका विवाह खंडवा के ठाकुर लक्ष्मण सिंह चौहान के साथ हुआ।

विवाहपरांत सुभद्रा जी के जीवन में एक नया मोड़ आया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रभावित होकर यह अपनी पढ़ाई लिखाई छोड़ कर देश सेवा में लग गई। यह राष्ट्रीय कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेती रही। देश सेवा के लिए इन्होंने कई बार जेल यात्रा भी की। पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के प्रेरणास्रोत रहे। चतुर्वेदी जी ने उनके साहित्य एवं राजनीतिक कार्यों को प्रोत्साहन देकर आगे बढ़ाया। चतुर्वेदी जी के सानिध्य में इनका स्थान और भी व्यापक हो गया।

यह मध्यप्रदेश विधानसभा की सदस्य चुनी गई। सुभद्रा जी का जीवन देश-प्रेम राष्ट्रीय गतिविधियों से परिपूर्ण हो रहा था। यह हिंदी साहित्य में वीर रस की कवित्री के रूप में उभर कर आई थी। वस्तु प्रकृति से कार्यकलाप की आसममाइक एक मोटर दुर्घटना में 1948 ईस्वी में इनका देहावसान हो गया।सुभद्रा जी ने कविता और कहानी दोनों विधाओं में लेखनी चलाई। मुकुल और त्रीधारा इनकी कविता है। सीधे-साधे चित्र, बिखरे मोती और उन्मादनी इनकी कहानियां है। इनकी कविताओं में झांसी की रानी प्रसिद्ध कविता है। इनकी कविताओं में सच्ची वीरांगना का ओज और शौर्य दिखाई देता है।

  • हिंदी कवित्री श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म सन 1908 में हुआ था।
  • सुभद्रा जी का जन्म इलाहाबाद के एक संपन्न परिवार में हुआ था।
  • इनके पिता का नाम ठाकुर रामनाथ सिंह था।
  • 15 वर्ष की अवस्था में सुभद्रा का विवाह खंडवा के ठाकुर लक्ष्मण सिंह चौहान के साथ हुआ।
  • विवाह के बाद सुभद्रा जी के जीवन में एक नया मोड़ आया।
  • राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रवाहित होकर सुभद्रा जी ने अपनी पढ़ाई-लिखाई छोड़ कर देश सेवा में तत्पर हो गई।
  • यह राष्ट्रीय कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेती रही।
  • देश की सेवा के लिए इन्होंने कई बार जेल की यात्रा की।
  • माखनलाल चतुर्वेदी ने इन्हें साहित्यिक एवं राजनीतिक कार्यों में प्रोत्साहन देकर आगे बढ़ाया।
  • माखनलाल चतुर्वेदी जी के सानिध्य में सुभद्रा जी का स्थान और भी व्यापक हो गया।
  • मुकुल और त्रीधारा सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता कृतियां है।
  • सुभद्रा ने आजादी की लड़ाई में भाग लेने वाले वीरों को अपनी कविता का विषय बनाया है इस तरह की कविताओं में झांसी की रानी प्रसिद्ध कविता है।
  • सुभद्रा कुमारी चौहान जी की कुछ कविताएं पति-प्रेम की भावना से अनुप्राणित हैं कुछ में संतान के प्रति सहज एवं मार्मिक अभिव्यक्ति मिलती है।
  • यह मध्य प्रदेश विधानसभा की सदस्य भी चुने गई।
  • सन 1948 ईस्वी में एक मोटर दुर्घटना में इनका देहावसान हो गया।

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